कर्पूर गौरं करुणावतारं मंत्र | Karpur Gauram Mantra 

शिव यजुर मंत्र, जिसे कर्पूर गौरम करुणावतारम् के नाम से भी जाना जाता है, सबसे प्रसिद्ध मंत्रों में से एक है जिसे किसी भी हिंदू ने अवश्य सुना होगा। यह भगवान शिव से संबंधित एक प्राचीन संस्कृत श्लोक और शैव धर्म में एक लोकप्रिय आरती है।

कर्पूर गौरम मंत्र यजुर्वेद में पाया जाता है, जो हिंदू धर्म के चार विहित ग्रंथों, वेदों में से एक है।

जब भी मंदिर में या हमारे घर में पूजा की जाती है तो कुछ मंत्रों का जाप अनिवार्य होता है। सभी देवी-देवताओं के मंत्र अलग-अलग होते हैं, लेकिन जब भी आरती की जाती है तो इस मंत्र का विशेष जाप किया जाता है

Table of Contents

कर्पूर गौरं मंत्र | Karpur Gauram Karunavtaram Mantra


कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि ॥

कर्पूर गौरम करुणावतारं मंत्र का अर्थ | Karpur Gauram Mantra Meaning in Hindi


अर्पूरगौरं – वह जो कपूर (कर्पूर) के समान शुद्ध/सफेद है।

करुणावतारम् – करुणा का अवतार।

संसारसारम् – जो संसार का सार है।

भुजगेंद्रहारम् – जिसकी माला सर्पराज है।

सदावसंतम हृदयराविंदे – सदैव कमल जैसे हृदय में निवास करने वाले। जहां, हृदय अरविंद का अर्थ है, ‘हृदय में, वह (कमल के समान शुद्ध) है’। यद्यपि कमल गंदे पानी में पैदा होता है, फिर भी वह अपने आसपास की कीचड़ से अछूता रहता है। इसी प्रकार, भगवान शिव सदैव (सदा) उन प्राणियों के हृदय में (वसंतम्) निवास करते हैं जो सांसारिक मामलों से प्रभावित नहीं होते हैं।

भावम् – भगवान के लिए

भवानीसहितम् नमामि – देवी भवानी (शिव की पत्नी देवी पार्वती का एक रूप) के साथ, मैं प्रणाम करता हूँ

कर्पूर गौरं मंत्र का महत्व


कर्पूर गौरं मंत्र का अत्यधिक महत्व है। इस मंत्र का जाप करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं:

  • भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।
  • सभी कष्ट दूर होते हैं।
  • मन शांत होता है।
  • पापों का नाश होता है।
  • मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • रोगों से मुक्ति मिलती है।
  • ग्रहों के दोष दूर होते हैं।
  • धन-धान्य की प्राप्ति होती है।
  • संतान प्राप्ति में सफलता मिलती है।
  • शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।

“कर्पूर गौरं मंत्र” का जाप कैसे करना चाहिए


कर्पूर गौरं मंत्र का जाप किसी भी शुभ समय पर किया जा सकता है। लेकिन सोमवार, प्रदोष काल और महाशिवरात्रि इस मंत्र के जाप के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। मंत्र का जाप करते समय ध्यान पूर्वक बैठकर माला से 108 बार मंत्र का जाप करना चाहिए।

मंत्र का जाप करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • मंत्र का जाप स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनकर करना चाहिए।
  • मंत्र का जाप करते समय मन शांत और एकाग्र होना चाहिए।
  • किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं होना चाहिए।
  • मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और धीमी गति से करना चाहिए।
  • मंत्र का जाप करते समय भगवान शिव की मूर्ति के सामने दीप प्रज्वलित करना चाहिए।
  • मंत्र का जाप पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ करना चाहिए।

Karpur Gauram Mantra Full Lyrics


कर्पूर गौरं करुणावतारं मंत्र जाप के लाभ


  • इस मंत्र के नियमित जाप से शिव भक्तों के रास्ते की सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं।
  • यह मंत्र अपने भक्तों को जीवन की हर चुनौतीपूर्ण स्थिति से निपटने में मदद करता है।
  • यदि आप नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करते हैं तो आपकी एकाग्रता बढ़ती है और आप किसी भी काम पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • यह मंत्र हमें ब्रह्मांड और हमारी आंतरिक आत्मा के साथ तालमेल बिठाने में मदद करता है।
  • यह मंत्र सभी मंत्रों से अधिक शक्तिशाली माना जाता है और नकारात्मकता को दूर करने का मूल मंत्र है।
  • शिव मंत्र का नियमित जाप हमारे शरीर के भीतर और बाहर दोनों जगह कंपन और ऊर्जा को बदल देता है और हमें जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता और समृद्धि प्रदान करता है।

निष्कर्ष


कर्पूर गौरं मंत्र भगवान शिव की भक्ति का एक सरल और शक्तिशाली तरीका है। इस मंत्र का जाप करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और सभी कष्टों दूर होते हैं। यदि आप भगवान शिव की भक्ति करना चाहते हैं तो कर्पूर गौरं मंत्र का जाप अवश्य करें।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इस मंत्र का जाप करने से पहले किसी गुरु या विद्वान से सलाह लेना उचित है।


FAQ

1. कर्पूर गौरं मंत्र क्या है?

कर्पूर गौरं मंत्र भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक लोकप्रिय मंत्र है। इसका अर्थ है “कर्पूर के समान गोरे रंग वाले, करुणा के अवतार, संसार के सार, सर्पों के हार वाले, सदैव वसंत ऋतु वाले, हृदय में विराजमान, भव और भवानी सहित भगवान शिव को नमस्कार।”

2. इसका क्या महत्व है?

यह मंत्र भगवान शिव की दया और करुणा का प्रतीक है। ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र का जाप करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और सभी कष्टों दूर होते हैं।

3. इस मंत्र का जाप कैसे करें?

इस मंत्र का जाप किसी भी शुभ समय पर किया जा सकता है। लेकिन सोमवार, प्रदोष काल और महाशिवरात्रि इस मंत्र के जाप के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। मंत्र का जाप करते समय ध्यान पूर्वक बैठकर माला से 108 बार मंत्र का जाप करना चाहिए।

4. क्या इस मंत्र का कोई विशेष नियम है?

जी हाँ, इस मंत्र का जाप करते समय कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। मंत्र का जाप स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनकर करना चाहिए। मंत्र का जाप करते समय मन शांत और एकाग्र होना चाहिए। किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं होना चाहिए।

5. क्या महिलाएं भी इस मंत्र का जाप कर सकती हैं?

जी हाँ, महिलाएं भी इस मंत्र का जाप कर सकती हैं। इस मंत्र में कोई लैंगिक भेदभाव नहीं है।

6. इस मंत्र का जाप करने से क्या लाभ होते हैं?

इस मंत्र का जाप करने से अनेक लाभ होते हैं। इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है, सभी कष्ट दूर होते हैं, मन शांत होता है, पापों का नाश होता है, और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

7. क्या इस मंत्र का कोई वैज्ञानिक आधार भी है?

कई शोधों से पता चला है कि मंत्रों के जाप का हमारे शरीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मंत्रों के जाप से तनाव कम होता है, रक्तचाप नियंत्रित होता है, और एकाग्रता बढ़ती है।

8. क्या बच्चों को भी इस मंत्र का जाप सिखाया जा सकता है?

जी हाँ, बच्चों को भी इस मंत्र का जाप सिखाया जा सकता है। इससे बच्चों में भक्ति भावना का विकास होता है और उनका मन शांत होता है।

9. इस मंत्र का उच्चारण करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

इस मंत्र का उच्चारण करते समय ध्यान रखना चाहिए कि सभी शब्दों का स्पष्ट उच्चारण हो। मंत्र का जाप धीमी गति से और स्वर में करना चाहिए।

10. क्या इस मंत्र के बारे में और भी कोई जानकारी है?

जी हाँ, इस मंत्र के बारे में कई पुस्तकों और वेबसाइटों में जानकारी उपलब्ध है। आप इन स्रोतों से इस मंत्र के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

11. क्या इस मंत्र का कोई बीजा नाम भी है?

जी हाँ, इस मंत्र को “कर्पूरेश्वर मंत्र” और “भस्मेश्वर मंत्र” के नाम से भी जाना जाता है।

12. क्या इस मंत्र का जाप करने के लिए कोई विशेष मुद्रा है?

इस मंत्र का जाप करते समय आप किसी भी आरामदायक मुद्रा में बैठ सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी हो और आपका मन शांत हो।

13. क्या इस मंत्र का जाप करते समय किसी विशेष माला का प्रयोग करना चाहिए?

इस मंत्र का जाप करते समय आप किसी भी प्रकार की माला का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन रुद्राक्ष या चंदन की माला का प्रयोग करना अधिक शुभ माना जाता है।

14. क्या इस मंत्र का जाप करते समय कोई विशेष माला का प्रयोग करना चाहिए?

जी हाँ, इस मंत्र का जाप करते समय आप किसी भी प्रकार की माला का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन रुद्राक्ष या चंदन की माला का प्रयोग करना अधिक शुभ माना जाता है।

15. क्या इस मंत्र का जाप करते समय ध्यान करना आवश्यक है?

जी हाँ, इस मंत्र का जाप करते समय ध्यान करना बहुत ही आवश्यक है। ध्यान करने से आपका मन शांत होता है और आप मंत्र का जाप पूरी एकाग्रता से कर सकते हैं।

16. क्या इस मंत्र का जाप करने से कोई दुष्प्रभाव भी हो सकता है?

नहीं, इस मंत्र का जाप करने से कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। यह मंत्र पूरी तरह से सुरक्षित और लाभकारी है।

17. क्या इस मंत्र का जाप किसी भी समय किया जा सकता है?

जी हाँ, इस मंत्र का जाप किसी भी समय किया जा सकता है। लेकिन सोमवार, प्रदोष काल और महाशिवरात्रि इस मंत्र के जाप के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

18. क्या इस मंत्र का जाप करते समय कोई विशेष माला का प्रयोग करना चाहिए?

जी हाँ, इस मंत्र का जाप करते समय आप किसी भी प्रकार की माला का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन रुद्राक्ष या चंदन की माला का प्रयोग करना अधिक शुभ माना जाता है।