Shubham Karoti Kalyanam | संध्या काल श्लोक | शुभं करोति कल्याणम्

Shubham Karoti Kalyanam Lyrics “शुभम करोति कल्याणम” (उच्चारण शू-भम का-रो-ती का-ल्या-नाम) एक संस्कृत श्लोक है जिसका अनुवाद है “दिव्य प्रकाश शुभता, कल्याण, स्वास्थ्य और समृद्धि लाए।”

यह एक लोकप्रिय दीप वंदना मंत्र है जो दीपक या दीया जलाते समय और प्रार्थना करते समय गाया जाता है, और भगवान जी को प्रसन्न करने वाला शक्तिशाली मंत्र है। दीपम पूजा या दीप पूजनम करते समय इसका जाप करें।

इस मंत्र का जाप मुख्यतः शाम के समय किया जाता है इसलिए इसे संध्याकाले श्लोक भी कहा जाता है।

यह लेख “शुभम करोति कल्याणम” के सार पर प्रकाश डालता है, जो हिंदू अनुष्ठानों में इसकी उत्पत्ति, व्याख्या, महत्व और समकालीन जीवन में इसके स्थायी महत्व की खोज करता है।

Table of Contents

शुभं करोति कल्याणम् | Shubham Karoti Kalyanam | संध्याकाले श्लोक


शुभं करोति कल्याणम
आरोग्यं धनसंपदा ।
शत्रुबुद्धि विनाशाय
दीपज्योति नमोsस्तुते ।
दिव्या दिव्या दिपत्कार
कानी कुंडले मोतीहार ।
दिव्याला पाहून नमस्कार ॥1॥

दिवा लावला देवांपाशी,
उजेड पडला तुळशीपाशी ।
माझा नमस्कार सर्व देवांपाशी ॥2॥

ये गे लक्ष्मी बैस गे बाजे,
आमुचे घर तुला सारे ।
तिळाचे तेल कापसाची वात,
दिवा जळो मध्यान्हात ।
घरातली इडापिडा बाहेर जावो
बाहेरची लक्ष्मी घरात येवो ।
घरच्या सर्वांना उदंड आयुष्य लाभो ॥3॥

दीपज्योति: परब्रह्म दीपज्योति: जनार्दन ।
दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोsस्तुते ॥4॥

अधिराजा महाराजा वनराजा वनस्पति ।
इष्टदर्शनं इष्टान्नं शत्रूणांच पराभवम्‌ ।
मुले तो ब्रह्मरुपाय मध्ये तो विष्णुरुपिण: ।
अग्रत: शिवरुपाय अश्वत्थाय नमो नम: ॥5॥


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उत्पत्ति और संदर्भ

“शुभम करोति कल्याणम” की सटीक उत्पत्ति अस्पष्ट बनी हुई है। हालाँकि, यह भाषा प्राचीन संस्कृत ग्रंथों में अपनी जड़ों की ओर इशारा करती है। यह श्लोक संभवतः हिंदू प्रार्थनाओं और भजनों की समृद्ध परंपरा से निकला है, जिन्हें स्तोत्र के नाम से जाना जाता है। इन भजनों का जाप देवताओं का आह्वान करने, आभार व्यक्त करने या आशीर्वाद लेने के लिए किया जाता है।

“शुभम करोति कल्याणम्” किसी विशिष्ट प्रमुख हिंदू धर्मग्रंथ में नहीं आता है, लेकिन इसकी मूल अवधारणाएं विभिन्न दार्शनिक और धार्मिक ग्रंथों के साथ प्रतिध्वनित होती हैं। वेद, उपनिषद और पुराण सभी एक शुभ जीवन (शुभ जीवन) जीने और कल्याण (कल्याणम) प्राप्त करने के महत्व पर जोर देते हैं।

‘शुभम करोति कल्याणम्’ का अर्थ क्या है?

सुभम करोति कल्याणम् मंत्र का अर्थ है: मैं उस दीपक की रोशनी को नमन करता हूं जो वातावरण को शुद्ध करती है और स्वास्थ्य और धन को बढ़ाती है। जो शत्रु बुद्धि यानि अज्ञान या मन के अंधकार को दूर करता है।

आइए इसके गहरे अर्थ को समझने के लिए श्लोक को शब्द दर शब्द तोड़ें:

शुभम् (शुभम्): इस शब्द का अनुवाद “शुभ,” “अच्छा,” या “भाग्यशाली” है। यह नकारात्मकता या दुर्भाग्य से मुक्त, कल्याण की स्थिति का प्रतीक है।
करोति (करोति): इसका अनुवाद “कर सकता है” या “ला सकता है।” यह शुभता के आगमन की कामना या प्रार्थना व्यक्त करता है।
कल्याणम् (कल्याणम्): यह शब्द “कल्याण,” “समृद्धि,” या “सौभाग्य” का प्रतीक है। इसमें न केवल भौतिक धन बल्कि अच्छा स्वास्थ्य, खुशी और मन की शांति भी शामिल है।

इसलिए, संपूर्ण श्लोक शुभता, कल्याण, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करने के लिए दिव्य प्रकाश के लिए प्रार्थना का अनुवाद करता है।

अनुष्ठानों का महत्व

“शुभम करोति कल्याणम” विभिन्न हिंदू अनुष्ठानों और दैनिक प्रथाओं में अपना स्थान पाता है। यहां कुछ प्रमुख उदाहरण दिए गए हैं:

आरती: आरती के दौरान देवताओं को तेल से भरा दीपक और बाती अर्पित की जाती है। आरती करते समय दैवीय सत्ता से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए “शुभम करोति कल्याणम” का जाप किया जा सकता है।

संध्या दीपम: शाम के दीपक को जलाना, कई हिंदू घरों में एक दैनिक अभ्यास है, अक्सर “शुभम करोति कल्याणम” के जाप के साथ किया जाता है। यह आने वाली रात में शांति और कल्याण के लिए प्रार्थना का प्रतीक है।

पूजा: इस श्लोक का पाठ पूजा (पूजा अनुष्ठान) के दौरान परमात्मा का आह्वान करने और अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और बाधाओं से मुक्त जीवन के लिए आशीर्वाद मांगने के लिए किया जा सकता है।

हवन (यज्ञ): हवन के दौरान, पर्यावरण में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता को आमंत्रित करने के लिए अग्नि अनुष्ठान, “शुभम करोति कल्याणम” का जाप किया जा सकता है।

इस श्लोक का जाप करके, भक्त एक सार्वभौमिक ऊर्जा में अपना विश्वास व्यक्त करते हैं जो कल्याण ला सकती है। यह मनुष्यों और दैवीय क्षेत्र के बीच अंतर्संबंध की याद दिलाता है।

कैसे इसे रोजमर्रा की जिंदगी के लिए Use करे

“शुभं करोति कल्याणम्” अनुष्ठानों में इसके उपयोग से परे है। यह रोजमर्रा की जिंदगी के लिए एक शक्तिशाली संदेश प्रदान करता है:

सकारात्मकता पर ध्यान दें: यह श्लोक हमें आशावादी दृष्टिकोण विकसित करने और शुभता से भरे जीवन के लिए प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

खुशहाली के लिए आभार: यह हमें अच्छे स्वास्थ्य, समृद्धि और जीवन के सकारात्मक पहलुओं की सराहना करने की याद दिलाता है।

अंतर्संबंध: “शुभम करोति कल्याणम” इस विचार का प्रतीक है कि हमारी भलाई दूसरों और संपूर्ण ब्रह्मांड की भलाई से जुड़ी हुई है।
उद्देश्य के साथ जीना: शुभता की तलाश से, हमें एक सार्थक जीवन जीने और दुनिया में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

समसामयिक प्रासंगिकता

आज की तेज़-तर्रार दुनिया में, “शुभम करोति कल्याणम” एक प्रासंगिक संदेश बना हुआ है। यह एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है:

भलाई को प्राथमिकता दें: सफलता की तलाश में, कोई भी आसानी से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की उपेक्षा कर सकता है। यह श्लोक हमें समग्र कल्याण को प्राथमिकता देने का आग्रह करता है।

सकारात्मकता को अपनाएं: आधुनिक जीवन में नकारात्मकता और तनाव व्याप्त है। “शुभम करोति कल्याणम” हमें सकारात्मक मानसिकता विकसित करने, लचीलापन और आंतरिक शांति को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करता है।

कृतज्ञता का अभ्यास करें: जीवन में अच्छी चीजों की सराहना करने के लिए समय निकालने से खुशी और संतुष्टि को बढ़ावा मिलता है।

दया और करुणा: “शुभम करोति कल्याणम” के माध्यम से अपने और दूसरों के लिए कल्याण की तलाश करके, हमें अपनी बातचीत में दया और करुणा का अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह अधिक सामंजस्यपूर्ण और सकारात्मक दुनिया को बढ़ावा देता है।

अनुकूलन और विविधताएँ

“शुभम करोति कल्याणम” ने समय के साथ विभिन्न अनुकूलन और विविधताओं को प्रेरित किया है

संगीत रचनाएँ: छंदों को भक्ति गीत (भजन) और भजन (श्लोक) में शामिल किया जाता है। लता मंगेशकर जैसे प्रसिद्ध कलाकारों ने इस कविता की लोकप्रिय प्रस्तुतियों में अपनी आवाज दी है। ये संगीतमय व्याख्याएँ “शुभम करोति कल्याणम” के संदेश को व्यापक दर्शकों के लिए अधिक सुलभ और प्रेरक बनाती हैं।

विस्तारित मंत्र: मूल छंदों को कभी-कभी लंबे मंत्रों में विस्तारित किया जाता है जिसमें देवताओं के अतिरिक्त आह्वान या कल्याण के विभिन्न पहलुओं के लिए विशिष्ट प्रार्थनाएं शामिल होती हैं। उदाहरण के लिए, कुछ संस्करणों में अच्छे स्वास्थ्य, धन, बुद्धि और शांति के लिए आशीर्वाद माँगने का उल्लेख हो सकता है।

निष्कर्ष

“शुभं करोति कल्याणम्” धर्म और संस्कृति की सीमाओं से परे है। अच्छाई, कल्याण और परस्पर जुड़ाव की तलाश का इसका संदेश विभिन्न पृष्ठभूमि और विश्वास प्रणालियों के लोगों के साथ प्रतिध्वनित होता है।

चाहे किसी धार्मिक समारोह में जप किया जाए या चिंतन के क्षण में चुपचाप चिंतन किया जाए, “शुभम करोति कल्याणम” एक सार्थक और सकारात्मक जीवन जीने के लिए एक शक्तिशाली और स्थायी संदेश प्रदान करता है।

यह हमें न केवल अपनी भलाई के लिए, बल्कि अपने आस-पास के लोगों और पूरी दुनिया की भलाई के लिए भी प्रयास करने की याद दिलाता है।

अंत में, यहां विचार करने के लिए कुछ अतिरिक्त बिंदु दिए गए हैं:

  • व्यक्तिगत चिंतन: आप “शुभम करोति कल्याणम्” के संदेश को अपने दैनिक जीवन में कैसे शामिल कर सकते हैं?
  • सकारात्मकता फैलाना: आप अच्छाई और कल्याण का संदेश दूसरों के साथ कैसे साझा कर सकते हैं?
  • एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जीना: आप एक अधिक सकारात्मक और अच्छी दुनिया बनाने में कैसे योगदान दे सकते हैं?

इन सवालों पर विचार करके और “शुभम करोति कल्याणम” में सन्निहित सिद्धांतों का सक्रिय रूप से अभ्यास करके, हम सभी अधिक शांतिपूर्ण और समृद्ध भविष्य में योगदान दे सकते हैं।


Shubham Karoti Kalyanam Lata Mangeshkar


Shubham Karoti Kalyanam Mantra

FAQ

1. “शुभं करोति कल्याणम्” का क्या अर्थ है?

“शुभं करोति कल्याणम्” संस्कृत का एक वाक्य है जिसका अर्थ है “जो शुभ करता है, वही कल्याणकारी होता है”। यह वाक्य भगवान विष्णु की महिमा का वर्णन करता है। भगवान विष्णु को रक्षक और पालनहार के रूप में जाना जाता है। वे हमेशा सभी प्राणियों का भला करते हैं और उन्हें कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं।

2. यह वाक्य कहाँ से आया है?

यह वाक्य “विष्णु सहस्रनाम” से लिया गया है। “विष्णु सहस्रनाम” भगवान विष्णु के 1000 नामों का संग्रह है। यह हिंदू धर्म के सबसे प्रसिद्ध स्तोत्रों में से एक है।

3. इस वाक्य का क्या महत्व है?

यह वाक्य हमें सिखाता है कि हमें हमेशा दूसरों का भला करना चाहिए। जो लोग दूसरों की मदद करते हैं और उन्हें खुशी देते हैं, वे स्वयं भी खुश रहते हैं। यह वाक्य हमें यह भी सिखाता है कि भगवान विष्णु हमेशा हमारी रक्षा करते हैं और हमारा भला करते हैं।

4. क्या इस वाक्य का कोई मंत्रीय महत्व भी है?

जी हाँ, इस वाक्य का मंत्रीय महत्व भी है। यह वाक्य भगवान विष्णु का एक मंत्र माना जाता है। इस मंत्र का जाप करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और सभी कष्टों दूर होते हैं।

5. इस मंत्र का जाप कैसे करें?

इस मंत्र का जाप किसी भी शुभ समय पर किया जा सकता है। लेकिन सोमवार, विष्णु पक्ष, और एकादशी इस मंत्र के जाप के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। मंत्र का जाप करते समय ध्यान पूर्वक बैठकर माला से 108 बार मंत्र का जाप करना चाहिए।

6. इस मंत्र का जाप करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

▪ मंत्र का जाप स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनकर करना चाहिए।
▪ मंत्र का जाप करते समय मन शांत और एकाग्र होना चाहिए।
▪ किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं होना चाहिए।
▪ मंत्र का उच्चारण स्पष्ट और धीमी गति से करना चाहिए।
▪ मंत्र का जाप करते समय भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने दीप प्रज्वलित करना चाहिए।
▪ मंत्र का जाप पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ करना चाहिए।

7. “शुभं करोति कल्याणम्” का प्रयोग कहाँ किया जाता है?

इस वाक्य का प्रयोग अक्सर धार्मिक अनुष्ठानों, स्तोत्रों, और प्रार्थनाओं में किया जाता है। इसका प्रयोग शुभ कार्यों के शुभारंभ में भी किया जाता है।

8. क्या इस वाक्य का प्रयोग किसी भी भाषा में किया जा सकता है?

जी हाँ, इस वाक्य का प्रयोग किसी भी भाषा में किया जा सकता है। इसके अर्थ का अनुवाद अन्य भाषाओं में आसानी से किया जा सकता है।

9. क्या बच्चे भी “शुभं करोति कल्याणम्” का जाप कर सकते हैं?

जी हाँ, बच्चे भी “शुभं करोति कल्याणम्” का जाप कर सकते हैं। यह मंत्र बच्चों के लिए भी बहुत लाभकारी है। यह मंत्र बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करता है और उन्हें भगवान विष्णु की भक्ति के मार्ग पर ले जाता है।

10. “शुभं करोति कल्याणम्” का हमारे जीवन में क्या महत्व है?

“शुभं करोति कल्याणम्” का हमारे जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह संस्कृत का एक श्लोक है जिसका अर्थ है “जो शुभ करता है, वही कल्याणकारी होता है।”
इस श्लोक में निहित संदेश हमारे जीवन को दिशा प्रदान करते हैं:
1. कर्म का महत्व: यह श्लोक हमें सिखाता है कि हमारे कर्म ही हमारे जीवन का निर्धारण करते हैं। यदि हम सदैव अच्छे कर्म करते रहेंगे, तो निश्चित रूप से हमें शुभ फल प्राप्त होंगे।
2. परोपकार का महत्व: “शुभं करोति कल्याणम्” का अर्थ केवल स्वयं के लिए ही नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी Gutes tun करना है। जब हम दूसरों की मदद करते हैं, तो न केवल उन्हें, बल्कि स्वयं को भी आनंद और संतुष्टि प्राप्त होती है।
3. ईश्वर पर विश्वास: यह श्लोक हमें ईश्वर पर विश्वास करने की प्रेरणा देता है। भगवान सदैव हमारी रक्षा करते हैं और हमारा भला करते हैं।
4. सकारात्मक सोच: “शुभं करोति कल्याणम्” सकारात्मक सोच का प्रतीक है। जब हम सकारात्मक सोच रखते हैं, तो हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
इस श्लोक को जीवन में उतारने के कुछ तरीके:
नित्यकर्म: प्रतिदिन सुबह उठकर ईश्वर की पूजा करें और “शुभं करोति कल्याणम्” मंत्र का जाप करें।
सदाचार: सदैव सत्य बोलें, दूसरों का सम्मान करें, और गलत कामों से दूर रहें।
परोपकार: जरूरतमंदों की सहायता करें और दान-पुण्य करें।
सकारात्मक सोच: सदैव सकारात्मक सोच रखें और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
“शुभं करोति कल्याणम्” का पालन करके हम अपने जीवन को सार्थक और खुशहाल बना सकते हैं।